Friday, January 25, 2013

Temi Tea – The Flavor of Sikkim

Feature on a Success Story PIC, Temi-Tarku                      Khagendramani Pradhan*
Amidst the backdrop of picturesque and mighty Mt. Khanchan Dzonga refreshed by the gentle breeze of river Teesta brews the morning sip of Sikkim – the Temi tea. Spread over 180 hectares of gentle slope with altitude ranging from 4500 to 6316 feet, the Temi tea garden produces one of the finest orthodox tea that promises the appreciation of tea connoisseur.

The Temi Tea estate was established in 1969 during the erstwhile regime of Chogyal and the commercial production started in the year 1977. In the year 1974 Tea board was formed to govern the day to day functioning of the estate and later it went on to become the subsidiary of Industries Department under Sikkim government.  Temi Tea which apart from providing direct employment to over four hundred labors and thirty personnel, also is a major employer in the Government sector.

The gentle slopes that originate from the Tendong hill range has loamy soils condition with slope of 30–50% that suits best for tea plantation and produces nearly 100 tons of tea annually. Although the quantity of produce may seem insignificant in terms of major tea producing estates, the quality and the flavor it produces has been able to win the heart of tea aficionados within India and the world.

The tea produced by the Temi Tea estate is packaged under many brand names like "Temi Tea" which is of the best quality consisting of pure tea golden flowery orange pekoe. The next in quality is the popular brand of 'Sikkim Solja' followed by 'Mystique' and 'Kanchanjunga Tea'. It is also sold in the form of 'Orthodox dust tea'. While nearly 70 percent of the produce is sold in public auction at Kolkata through its authorized broker, the rest is converted into retail packets and sold in the local market.

The geographical location and the young plantation supplemented by organic method of production have further added to the value and flavor of tea leaves produced from this estate. Temi Tea garden closely followed the guidelines issued by IMO, Switzerland and with the completion of observation period, Temi Tea Estate was certified 100 percent organic by IMO India, a member group of IMO Switzerland in 2008. In addition, it is also a HACCP certified estate as per ISO -22000 standard under Food Safety Management System ensuring finest of quality product reaching the market. It may be noted that Temi  tea  garden is also the recipient of All  India Quality  Award from  Tea  Board  of  India  for  the  two consecutive years.

The conversion of entire production process from conventional to organic with inputs like bio-fertilizers and pesticides like vermin-compost manure, neem cakes and castor cakes, have not only opened bigger market in international market, but has also seen a surge in demand amongst the tourist visiting Sikkim. Nearly one hundred acres of forest land at its disposal amply supplies the bio-mass to the estate making it self-reliant for required inputs.

By abandoning the use of agro-chemical and adopting organic means of production, the Temi tea estate has not only curtailed the cost of production, but also has opened wider arena of market preferring organic produce free from harmful chemicals. The Temi Tea board boasts of coming to breakeven point and substantially contributing to the State exchequer.

While Germany, United Kingdom, America and Japan constitute the major buyer, efforts are on way to further diversify the product in view of growing demand for green teas including redesigning of more attractive packets for value addition. This apart, efforts are underway to source direct buyers in foreign market for tea produced in Sikkim. The Tea Board of late has started directly exporting small quantities of organic tea to Canada and Japan where it has been fetching comparatively competitive and attractive prices.

Though, the expansion of tea plantation has been thwarted due to non availability of suitable land, Temi tea estate has been offering assistance to small scale grower and producers by providing quality planting materials and other technical knowhow. The garden nursery produces some of the best clone planting material, which is distributed among the small tea growers’ cooperatives in the state.

Though Temi Tea has lived up to expectation of many tea connoisseurs, given the climatic condition in the estate, there still is scope for production of high value and high return finest tea leaves.  
  (PIB Features)  
02-January-2013 17:01 IST
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* Freelance Journalist.Disclaimer: The writer is a freelance journalist and the views expressed by the author in this feature are entirely his own and do not necessarily reflect the views of PIB.SS-01/SF-01/02.01.2013
RTS/HSN

Sunday, January 6, 2013

सिक्किम की सुगंध-टेमी चाय

03-जनवरी-2013 14:58 IST
दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया 
टेमी चाय पर विशेष लेख विशेष लेख                                        * खगेन्‍द्रमणि प्रधान
                                                                                                                                  Courtesy Photo
आकर्षक और भव्‍य माउंट कंचन ज़ोंगा की पृ‍ष्‍ठभूमि में तीस्‍ता नदी की सुहावनी समीर के साथ सिक्किम हर सुबह टेमी चाय का आनंद लेता है। 4500 से 6,316 फुट की ऊंचाई पर फैली ढलान वाली 180 हेक्‍टेयर भूमि में टेमी चाय के बागान हैं, जहां बहुत ही बढ़िया परम्‍परागत चाय की पैदावार होती है, जिसकी चाय के कदरदान तारीफ करते नहीं थकते।
    टेमी चाय बागान की स्‍थापना सिक्किम के पूर्व नरेश चोग्‍याल के शासनकाल में 1969 में हुई थी और बड़े पैमाने पर इसका उत्‍पादन 1977 में शुरू हुआ। चाय बागान के रोजमर्रा के काम-काज को व्‍यवस्थित रखने के लिए 1974 में चाय बोर्ड की स्‍थापना की गई और बाद में यह सिक्किम सरकार के अंतर्गत उद्योग विभाग की सहायक कम्‍पनी बन गई। टेमी चाय से जहां एक ओर 4 हजार से अधिक श्रमिकों और 30 कर्मचारियों को सीधे रोजगार मिलता है, वहीं यह कम्‍पनी सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाली एक बड़ी कम्‍पनी बन गई है।
    हल्‍की ढलान वाली यह भूमि तेंदोंग पर्वत श्रृंखला से शुरू होती है। 30-50 प्रतिशत ढलान वाली दुम्‍मट मिट्टी की यह भूमि चाय बागान के लिए बहुत ही उपयुक्‍त है और यहां साल में लगभग 100 टन चाय की पैदावार होती है। यदि बड़े चाय बागानों से मुकाबला किया जाए, तो यह पैदावार बहुत ज्‍यादा नहीं है, लेकिन इसकी गुणवत्‍ता और सुगंध ने भारत और दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया है।
    टेमी चाय बागान में पैदा हुई चाय को ''टेमी चाय'' जैसे कई ब्रांड नामों से पैक किया जाता है, जो सबसे बढ़िया क्‍वालिटी की चाय होती है, जिसमें सुनहरी फूलों जैसी नारंगी झलक वाली बढि़या काली चाय होती है। इसके बाद दूसरी बढ़िया चाय का लोकप्रिय ब्रांड नाम है 'सिक्किम सोलजा' और उसके बाद 'मिस्‍टीक चाय' और 'कंचनजंगा' चाय का नाम आता है। इसे 'ऑर्थोडोक्‍स डस्‍ट टी' के नाम से बेचा जाता है। चाय की लगभग 70 प्रतिशत पैदावार अधिकृत दलाल के माध्‍यम से कोलकाता में सार्वजनिक नीलामी से बेची जाती है और बा‍की की चाय के रिटेल (खुदरा बिक्री के लिए) पैकेट बनाए जाते हैं और स्‍थानीय बाजार में बेचे जाते हैं।
    चाय बागान की भूमि की भौगोलिक स्थिति और चाय के पौधों को जैविक खाद से पोषित करने से इस चाय बागान में पैदा होने वाली चाय के पत्‍तों की कीमत और सुगंध और बढ़ जाती है।
    टेमी चाय बागान ने स्विटज़रलैंड की बाजार नियंत्रण से संबंधित संस्‍था-आईएमओ  के निर्देशों का पालन किया और पर्यवेक्षण की अवधि पूरी होने के बाद आईएमओ इंडिया ने, जो आईएमओ स्विटज़रलैंड का सदस्‍य समूह है, 2008 में टेमी चाय बागान को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक का प्रमाण पत्र दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत भी यह आईएसओ-22,000 मानक के अनुसार एचएसीसीपी द्वारा भी परमाणीकृत चाय बागान है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार पहुंचने वाला उत्‍पाद उत्‍तम गुणवत्‍ता वाला है। यह भी उल्‍लेखनीय है कि टेमी चाय बागान को लगातार दो वर्षों से भारतीय चाय बोर्ड ने भी अखिल भारतीय गुणवत्‍ता पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया है।
    चाय उत्‍पादन की पूरी प्रक्रिया को परंपरागत से ऑर्गेनिक में बदलने से न केवल इसके लिए अंतर्राष्‍ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है, बल्कि सिक्किम जाने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्‍या में इसकी मांग करते हैं। चाय की ऑर्गेनिक खेती के लिए जैविक खाद और वर्मिन-कम्‍पोस्‍ट खाद, नीम और अरंण्‍डी की बट्टियों के रूप में कीटनाशक भी उपलब्‍ध होते हैं। चाय बागान के पास लगभग 100 एकड़ वन भूमि भी है, जिससे बड़ी मात्रा में चाय बागान के लिए जैविक खाद-पदार्थों की पूर्ति हो जाती है, जो इसे आवश्‍यक संसाधनों की दृष्टि से आत्‍मनिर्भर बनाता है।
    खेती में रासायनिक खादों के इस्‍तेमाल को छोड़कर पैदावार के ऑर्गेनिक तरीके अपनाने से न केवल टेमी चाय बागान की उत्‍पादन लागत कम हुई है, बल्कि हानिकारक रसायनों से मुक्‍त ऑर्गेनिक पैदावार को पसंद करने वालों का एक बहुत बड़ा बाजार भी मिल गया है। टेमी चाय बोर्ड को अपनी सफलता पर गर्व है और वह सरकारी राजस्‍व में भी पर्याप्‍त योगदान दे रहा है।
    जर्मनी, ब्रिटेन, अमरीका और जापान टेमी चाय के प्रमुख खरीददार हैं। ग्रीन टी की बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें विविधता लाने के कई प्रयास किए जा रहे है और इसकी कीमत बढ़ाने के लिए अधिक आकर्षक डिज़ाइन वाले पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा सिक्किम की इस चाय के लिए विदेशी बाजार में सीधे खरीददार बनाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। चाय बोर्ड ने कनाडा और जापान को ऑर्गेनिक चाय के छोटे पैकेट सीधे निर्यात करना भी शुरू कर दिया है, जहां इसके लिए स्‍पर्धात्‍मक और आकर्षक दाम मिल रहे हैं।
    चाय बागान के विस्‍तार के लिए उपयुक्‍त भूमि न मिलने से इसके क्षेत्र का विस्‍तार नहीं हो पा रहा है। लेकिन टेमी चाय बागान छोटे किसानों और उत्पादकों को बढ़िया पौध और अन्‍य तकनीकी जानकारी की सहायता उपलब्‍ध करा रहा है। बागान की नर्सरी में बढ़िया पौध तैयार की जाती है, जिसका वितरण राज्‍य के छोटे चाय बागानों की सहकारिताओं में किया जाता है।
    हालांकि टेमी चाय चाय पारखियों की उम्‍मीदों पर खरी उतरी है, फिर भी चाय बागान की जलवायु संबंधी परिस्थितियों को देखते हुए यहां अधिक कीमत वाली और बढि़या चाय पत्‍तों वाली पैदावार की अभी भी गुंजायश है।
            (PIB)       (पत्र सूचना कार्यालय विशेष लेख)सिक्किम की सुगंध-टेमी चाय
*फ्रीलांस पत्रकार
नोट: लेखक द्वारा इस लेख में व्‍यक्‍त किए गए विचार आवश्‍यक नहीं कि पत्र सूचना कार्यालय के विचारों से मेल खाते हों।

  
मीणा/राजगोपाल/लक्ष्‍मी-03

Monday, December 24, 2012

Success Story on Creative SHG:

20-December-2012 17:02 IST
On the Path of Progress and Sustenance
Feature by Suman Gazmer*  PIC, PASSINGDONG                  
An amount of Rs. 16 lakhs has been sanctioned by Sikkim Rural Development Agency under Rural Management & Development Department to Creative Self Help Group (SHG) of Namcheybong, Pakyong for establishing a rural product marketing centre.

Creative SHG was set up in 2010 under the Centrally Sponsored Scheme, Swarna Jayanti Grameen Swarojgar Yojana with six members. The SHG is engaged in noodles making and working hard to become self-reliant. The group is the most performing SHG in East district. The small scale industry of noodles is more vibrant in neighbouring region of Kalimpong in Darjeeling district. Sikkim is also a market for the noodles from this region. Considering the potential of noodles in Sikkim, the Creative SHG laid focus on this sector and visited various noodles production centres in Kalimpong to gain ideas. It also deputed some local youths of their villages to work at these centres so they learn the noodle making process.

Creative SHG is supplying three types of noodles-plain, vegetarian and non-vegetarian-in the market under the brand name ‘Sikkim Kanchen Product’. The markets are Gangtok, Pakyong, Singtam and Rangpo. The group is targeting to enter other parts of Sikkim also.

“We have involved some male members as we need their help too”, said the 12 member Group Head, Laxmi Rai. She further added that the economic conditions of every member has improved after the formation of the SHG. Every member knows the importance of collective effort.

Sikkim Rural Development Agency Project Officer D.R.Sharma said the Creative SHG is the best SHG in the East district. “The SHG completed the second grading and we have released subsidy of Rs. 1 lakh to it. Rural women folk should take inspiration from the SHG”, said Sharma.

The Creative SHG does not limit its activities to entrepreneurship. It is also actively working to create awareness among women folk of Sikkim and helping them to become empowered. Till now, the group has organized awareness and motivational programmes on benefits of SHGs to women of Rhenock, Rongli, Assam Linzey and other parts of the State.

The Creative SHG also shares its knowledge and experiences with other existing SHGs and has already conducted awareness programmes for the SHGs of Namcheybong, Dalapchand and Machong of East district. It is a regular participant in sale and exhibition meets organized in Gangtok, Jorethang and outside the State. The members also take products prepared by other SHGs when they go to participate in exhibitions outside Sikkim.
 (PIB Features)
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*Freelance Journalist
Disclaimer: The writer is a freelance journalist and the views expressed by the author in his feature are entirely his own and do not necessarily reflect the views of PIB.

SS-212/SF-212/20-12-2012
RTS/HSN

Monday, August 13, 2012

पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान के अंतर्गत अहम एलान

सिक्किम के लिए 2 करोड़ 51 लाख रूपये की केन्‍द्रीय मदद को मंजूरी 
युवा मामलों व खेल मंत्रालय ने पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान के अंतर्गत 70 ग्राम पंचायतो और 35 प्रखंड पंचायतों में खेल के मैदानों के रख-रखाव और क्रीड़ाश्री को मानदेय के भुगतान के लिए सिक्किम राज्‍य को जुलाई-अगस्‍त 2012 माह में 2 करोड़ 51 लाख रूपये की केन्‍द्रीय मदद को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही खेल के मैदानों और विकास के रख-रखाव के लिए इस राज्‍य के लिए अभी तक स्‍वीकृत की गई कुल अनुदान की राशि 6 करोड़ 87 लाख रूपये हो गई है।

सिक्किम में इस योजना का क्रियान्‍वयन खेल एवं युवा मामलों के विभाग के माध्‍यम से किया जा रहा है। पंचायत युवा क्रीड़ा और खेल अभियान के अंतर्गत 96 ग्रामीण पंचायतों और 29 प्रखंड पंचायतों के विकास के रख-रखाव के लिए 31 मार्च, 2012 तक (वर्ष 2008-09, 2009-10 और 2010-11 के लिए) इस विभाग को 4 करोड़ 36 लाख रूपये की राशि प्रदान की गई थी।

पंचायत युवा क्रीडा और खेल अभियान का लक्ष्‍य देशभर में ग्रामीण और प्रखंड पंचायतों में खेल के मैदानों का विकास और रख-रखाव करना और प्रखंड से राष्‍ट्रीय स्‍तर तक वार्षिक खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करना है। इस अभियान को राज्‍यभर में सरकारी/केन्‍द्रशासित प्रदेशों के माध्‍यम से लागू किया जाता है। पंचायत युवा क्रीडा और खेल अभियान वर्ष 2008-09 में शुरू किया गया था, जिसके अंतर्गत एक चरणबद्ध तरीके से देशभर में ग्रामीण और प्रखंड पंचायतों में खेल के मैदानों का विकास और रख-रखाव किया जाता है और प्रखंड, जि़ला, राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तर पर वार्षिक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इस योजना का लक्ष्‍य 10 वर्षों की अवधि में 2.50 लाख ग्रामीण पंचायतों और 6400 प्रखंड पंचायतों में खेल-कूद की बुनियादी सुविधाओं का निर्माण करना है। यह योजना राष्‍ट्रीय महिला प्रतियोगिताओं और पूर्वोत्‍तर खेलों के आयोजन के लिए वित्‍तीय मदद के रूप में भी प्रखंड, जि़ला, राज्‍य और राष्‍ट्रीय स्‍तरों पर वार्षिक ग्रामीण खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेशों को शत-प्रतिशत केन्‍द्रीय मदद प्रदान करता है। खेल के मैदानों के विकास और रख-रखाव के लिए पिछले चार वर्षों के दौरान (2008-09 से 2011-12तक) पंचायत युवा क्रीडा और खेल अभियान के अंतर्गत 51,759 ग्रामीण प्ंचायतों और 1,538 प्रखंड पंचायतो को शामिल किया गया है। (PIB) 
        13-अगस्त-2012 18:11 IST